दृष्टिकोण विकास का
बेहद विषम और विपरीत परिस्थितियों वाला इलाका है जिला नागौर। यहां के गांवों में आज भी कई ऐसी चुनौतियां और समस्याएं हैं, जिनका सामना शहरी क्षेत्र के लोगों को सामान्यत: नहीं करना पड़ता। नागौर जिले में अगर जायल व नागौर ब्लॉक इलाके को देखा जाए तो जिंदगी सहज नहीं लगती। यह ऐसा इलाका है, जो लगातार अकाल का सामना करता है। सामाजिक-आर्थिक विषमताएं अभी भी बरकरार हैं। उरमूल की गतिविधियों के तहत हमने सुख-सुविधाओं से वंचित और अत्यंत गरीबी झेल रहे इस इलाके को कामकाज के लिए चुना और यहां बदलाव लाने की ठानी। हमने 1993 में उरमूल खेजड़ी संस्थान का मुख्यालय इसी ठेठ देहाती क्षेत्र के गांव झाड़ेली में स्थापित किया ताकि लोगों के बीच रह कर वास्तविकता से रूबरू हो सकें। उरमूल की समृद्ध परंपराओं का निर्वाह करते हुए हमने यहां दलितों, गरीबों, असहायों, मजदूरों, पीडि़तों, विधवाओं, विकलांगों और शिक्षा से वंचित बच्चों को लक्ष्यबद्ध कर उनके जीवन स्तर में सुधार लाने के प्रयास शुरू किए, जो निरंतर जारी हैं। क्षेत्र के करीब पचास गांवों में उरमूल की ओर से विभिन्न गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। हमारे प्रयासों से यहां सब कुछ बदल गया हो, ऐसा दावा तो नहीं किया जा सकता मगर हां, बहुत कुछ जरूर बदला है। अकाल के कारण पलायन करने वाले श्रमिकों की समस्याओं के समाधान के लिए हमने जो प्रयास किए, उनका प्रतिफल सबके सामने है। शिक्षा से वंचित बच्चों, खासकर बच्चियों को आवासीय शिविरों में पढ़ाने जैसा महत्वपूर्ण कार्य हम निरंतर जारी रखे हुए हैं। भले ही इस इलाके में आज भी नाबालिग बच्चियों के हाथ पीले कर दिए जाते हों मगर खुशी है उनके परिजन गौना होने तक उनकी पढ़ाई के लिए आगे आ रहे हैं। ऐसी बच्चियों ने हमारे शिविरों में अनौपचारिक शिक्षा के बाद आठवीं-दसवीं कक्षा उत्तीर्ण की है। दृष्टि कार्यक्रम के जरिए नेत्र संबंधी रोगों के इलाज व दृष्टि बाधित लोगों को रोजगार से जोडऩे की दिशा में काम हो रहा है। गांवों में अस्पृश्यता को दूर करने के लिए सामुदायिक जलस्रोतों के जीर्णोद्धार व व्यक्तिगत जलस्रोतों की उपलब्धता जैसा अनूठा काम उरमूल खेजड़ी के प्रयासों का ही उदाहरण है। उरमूल की गतिविधियों की बदौलत यह बदलाव इस इलाके में भविष्य की सुखद तस्वीर पेश करता है। इसका श्रेय यकीनन संस्था के स्वयंसेवकों की मेहनत व समर्पण को है लेकिन इसमें इलाके के जन प्रतिनिधियों, समाजसेवियों तथा बुद्धिजीवियों का भी अविस्मरणीय सहयोग है, जिन्होंने हर मुश्किल व जरूरत के समय हमारा साथ दिया। हम ग्रामीण राजस्थान के विकास में इसी प्रकार जुटे रहने का संकल्प करते हैं। सादर आभार।
धन्नाराम
सचिव,उरमूल खेजड़ी संस्थान

